अपनी मांगों को लेकर राजधानी पहुंचे दिव्यांग छात्र
लखनऊ
महामारी से उत्पन्न हलातों ने शिक्षा व्यवस्था पर प्रतिकूल प्रभाव डाला है लेकिन आर्थिक संसाधनों की कमी के चलते दिव्यांग छात्रों की समस्या सामान्य छात्रों के मुकाबले कही अधिक बड़ी हैं उस पर उत्तर प्रदेश की शिक्षा व्यवस्था में फैले भ्रष्टाचार ने ऐसे दिव्यांग छात्रों की समस्या को बढ़ाने का ही काम किया है। पश्चिमी उत्तर प्रदेश के मरेठ जिले से आए राजधानी लखनऊ में भटक रहे एक दर्जन से ज्यादा दृष्टिबाधित दिव्यांग छात्रों ने तरूणमित्र संवाददाता को अपनी व्यथा बताते हुए जानकारी दी कि प्रदेश के दिव्यांगजन सशक्तिकरण विभाग द्वारा संचालित स्पर्श राजकीय दृष्टिबाधित इंटर कालेज में पढऩे वाले छात्रों को विभागीय भ्रष्टाचार के चलते कितनी कठिनाईयों का सामना करना पड़ रहा है। बदले हुए पाठ्यक्रम में दृष्टिबाधित छात्रों के लिए उपलब्ध कराई जाने वाली विशेष अध्ययन समाग्री में किसी भी विषय की किताबें उपलब्ध नहीं है जबकि मौजूदा शिक्षा सत्र समाप्त होने वाला है और इस वर्ष की वार्षिक बोर्ड परीक्षा होने वाली है। मूलभूत आवश्यकताओं की पूर्ति न हो पाने के कारण ऐसे अनेक दृष्टिबाधित छात्रों को मजबूरन इस वर्ष बोर्ड की परीक्षा देने से वंचित रहना पड़ेगा। छात्रों द्वारा यह भी जानकारी दी गई कि उन्होंने उत्तर प्रदेश शासन के मुख्य सचिव से मिलकर एक पत्र देने का प्रयास किया था लेकिन उन्हें लोकभवन के सामने तैनात सुरक्षा कर्मियों ने भाजपा कार्यालय गेट के पास छोड़ दिया।अब वे नहीं जानते कि उनकी समस्या का समाधान कौन करेगा।छात्रों के अनुसार कोरोना के चलते सरकारी छात्रावास पर भी ताला लटका हुआ है और किसी तरह पैसे जुटाकर राजधानी पहुंचे इन छात्रों को अब चुनाव के बाद ही कुछ हो पाने का भरोसा रह गया है।
