इनके सहयोग के बिना जिला सरकार में नहीं हो पा रहे काबिज
भोपाल
भाजपा व कांग्रेस जहां प्रदेश के अधिकांश जिलों में सरकार बनाने के दावे कर रहे है, वहीं जीतकर आये निर्दलीय सदस्य ज्यादा दमदार दिखाई दे रहे हैं। क्योंकि जिला सरकार गठन के मुकाबले में इनकी भूमिका अहम है। 29 जुलाई को जिला पंचायतों के प्रथम सम्मेलन हालांकि यह तय हो जाएगा कि इनका हाथ किसके साथ है। इसलिये अध्यक्ष निर्वाचन के प्रस्तावित कार्यक्रम को देखते हुए दावेदारों द्वारा इनकी घेराबंदी भी शुरु कर दी गई है। वजह यह भी है कि जिला पंचायत के नवनिर्वाचित सदस्यों में 129 किसी दल के सदस्य नहीं हैं। वहीं कई स्थानों पर भाजपा व कांग्रेस जैसे बड़े दलों की हैसियत इतनी नहीं बची है कि मौजूदा सदस्यों की संख्या बल के आधार पर जिला पंचायत की कुर्सी लपक सकें। लिहाजा यह इन निर्दलीय सदस्यों के सहारे जिला सरकार पर काबिज होने की कोशिशों में जुट गये हैं। आंकलन इसी से किया जा सकता है कि भाजपा ने 52 जिला पंचायतों में जहां 44 पर बहुमत का दावा कर दिया है। वहीं मुकाबले में चुनौती बनी कांग्रेस ने 875 सदस्यों वाले इस निकाय चुनाव में 386 सीट जीतकर सबसे बड़े दल के रूप में उभरने का दावा किया है। इसको देखते हुए मुकाबला जहां दिलचस्प माना जा रहा है। वहीं इनके सामने निर्ददियों को साधने की चुनौती है। बता दें सबसे ज्यादा निर्दलीय सदस्य रीवा में 11 जीते हैं। जबकि शिवपुरी में सात, सतना में छह और गुना में चार चुनकर सामने आए हैं। प्रदेश में अध्यक्षों का चुनाव कराने के लिए निर्वाचन आयोग ने आगामी 29 जुलाई की तिथि तय कर दी है। इसके पहले 27 व 29 जुलाई को जनपद पंचायत के अध्यक्ष तथा उपाध्यक्ष के चुनाव कराए जाएंगे। ऐसे में राजनीतिक दलों के सामने निर्दलियों को साधने कम समय रह गया है। इसलिये यह दावेदारों के सहारे इन पर डोरे डालने में जुट गये हैं। जिला पंचायत के परिणाम घोषित होने के साथ ही लाभ हानि के गणित को देखते हुए सदस्य स्थान छोडक़र प्रवास पर निकल गये हैं। बताया जाता है कि इनका खर्च संबंधित जिला पंचायत के दावेदारों द्वारा उठाया जा रहा है। इसमें भोपाल जिला पंचायत भी शामिल है। बताया जाता है कि अध्यक्ष बनने की जुगत भिड़ा रहे कांग्रेस नेता सदस्यों के साथ राजस्थान के एक धार्मिक स्थल पर पहुंच चुके हैं। इसी तरह रीवा व सतना के हाल भी बताए जा रहे हैं। प्रदेश भाजपा अध्यक्ष विष्णुदत्त शर्मा कमलनाथ पर छिंदवाड़ा जिला पंचायत के सदस्य संजय पुन्हार के अपहरण का आरोप लगा चुके हैं। जबकि वह निर्दलीय हैं। वजह यह है कि इस बार जिला पंचायत अध्यक्ष का पद एससी वर्ग के लिए आरक्षित है, लेकिन भाजपा समर्थित जिला पंचायत सदस्य में एक भी एससी वर्ग का विजयी प्रत्याशी नहीं है, ऐसे में निर्दल्ीय प्रत्याशी संजय पुन्हार के भरोसे हैं। यहां 26 जिला पंचायत सदस्य हैं।
