कोरोना से 23 साल के बेटे की मौत के बाद अस्‍पताल का बिल चुकाने को नहीं थे पैसे, शव के लिए तड़पता रहा पिता

हापुड़

कोरोना का क्रूर काल न जाने क्या-क्या दिन और न जाने कितनी हृदयविदारक घटनाओं से रूबरू कराएगा। 23 वर्षीय बेटे की कोरोना से मौत के बाद अस्पताल ने शव इसलिए देने से मना कर दिया, क्योंकि पिता के पास देने को बिल के 54 हजार रुपये नहीं थे। इतना ही नहीं बेटे का शव अस्पताल की मोर्चरी में रखा था और बेटे की पत्नी बार-बार उससे फोन पर बात करने की जिद कर रही थी। एक बेबस पिता का यह हाल देखकर वहां मौजूद कोई भी व्यक्ति अपने आंसू न रोक सका।
हापुड़ के पिलखुवा निवासी मनोज गोयल कोरोना काल में पैसे-पैसे को मोहताज हो गया। इसी बीच उसका पुत्र भी कोरोना की चपेट में आ गया। पीड़ित पिता ने हिन्दुस्तान अखबार और एसडीएम धौलाना की मदद से अपने 23 वर्षीय बेटे को रामा मेडिकल में भर्ती करा दिया, लेकिन होनी को कुछ मंजूर था। मंगलवार रात दो बेटे की कोरोना से मौत हो गई। बुधवार सुबह पीड़ित पिता जब बेटे का शव लेने पहुंचा तो अस्पताल प्रबंधन ने 54 हजार रुपये का बिल थमा दिया। इस पर पीड़ित पिता ने एसडीएम धौलाना पूरी बात बताई।
इस पर एसडीएम ने अस्पताल फोन कर अपने द्वारा बिल भुगतान का आश्वासन देते हुए पीड़ित को बेटे का शव देने के लिए कहा। अस्पताल वालों की कठोरता की पराकाष्ठा यह थी कि उन्होंने एसडीएम के आश्वासन को भी अनसुना कर दिया और बिना बिल जमा कराए शव देने साफ इनकार कर दिया। करीब छह घंटे बाद जैसे तैसे बेबस पिता 35 हजार लेकर आया और अस्पताल वालों से बेटे का शव लेकर गया और बेटे का अंतिम संस्कार कराया।

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