108 एंबुलेंस में तोड़फोड़, कर्मचारियों से मारपीट

ऋषिकेश। होली के हुड़दंग में कुछ लोगों ने सरकारी अस्पताल में दुर्घटना के घायल मरीज लेकर आई 108 एंबुलेंस में तोड़फोड़ कर दी। विरोध करने पर एंबुलेंस कर्मचारियों से मारपीट कर कपड़े फाड़ दिए। आसपास के लोगों को एकत्रित होते देख मारपीट करने वाले एंबुलेंस की चाबी लेकर भाग गए। जानकारी के मुताबिक शुक्रवार दोपहर रायवाला थाना क्षेत्र में हुए हादसे में घायल एक व्यक्ति को लेकर 108 आपातकालीन एंबुलेंस सेवा ऋषिकेश देहरादून मार्ग पर सरकारी अस्पताल पहुंची। यहां इमरजेंसी की ओर जाने वाले रास्ते के बीच आड़ी तिरछी खड़ी बाइकों से एंबुलेंस आगे नहीं बढ़ सकी। एंबुलेंस ईएमटी ने बाइकों के पास खड़े लोगों से रास्ते से बाइकें हटाने के लिए कहा। इस पर बाइकों के पास खड़े लोग भड़क गए और एंबुलेंस में तोड़फोड़ करने लगे। एंबुलेंस के ईएमटी अनिकेत और पायलट जयदेव कंडियाल ने उन्हें तोड़फोड़ करने से रोका। इस पर तोड़फोड़ करने वाले दबंग मारपीट पर उतारू हो गए। ईएमटी और पायलट की लात घूंसों से धुनाई कर दी। जानकर बचाकर भाग रहे 108 कर्मियों के कपड़े भी फाड़ डाले। चीख पुकार सुनकर लोगों को एकत्रित होते देख तोड़फोड़ और मारपीट करने वाले एंबुलेंस को लॉक कर दिया और चाबी लेकर फरार हो गए। शनिवार सुबह घटना की जानकारी मिलते ही रायवाला, शिवपुरी, रानीपोखरी और ऋषिकेश के 108 सेवा कर्मी ऋषिकेश कोतवाली पहुंचे और पुलिस को लिखित तहरीर देकर आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की। उपनिरीक्षक उत्तम रमोला ने उचित कार्रवाई का आश्वासन देकर 108 कर्मियों को शांत कराया। मौके पर एंबुलेंस कर्मी अनुज प्रसाद, अरूण रावत, अखंड प्रताप, संजय राणा, सूरज थापा, राजदीप, दीपक सिंह आदि मौजूद रहे।
नहीं मिली चाबी, ताले वाले को बुलाया:  एंबुलेंस की चाबी लेकर भागे लोगों के पास चाबी नहीं मिली। काफी खोजबीन की। एंबुलेंस की सेवा शुरू करने के लिए मौके पर डुप्लीकेट चाबी बनाने वाले को बुलाया गया। डुप्लीकेट चाबी से एंबुलेंस के लॉक को खोला गया।
जीवन बचाने वालों से ऐसा व्यवहार निंदनीय:   शनिवार सुबह 108 कर्मियों से मारपीट का मामला कोतवाली पहुंचा। यहां मौजूद लोगों ने घटना की निंदा करते हुए कहा कि दूसरों का जीवन बचाने वाले लोगों के साथ इस तरह का व्यवहार माफी लायक नहीं है। पुलिस ने मारपीट के मामले में दो लोगों को हिरासत में लिया। काफी जद्दोजहद के बाद दोनों पक्षों में समझौता होने पर कानूनी कार्रवाई नहीं की गई।

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