हिजाब मामले में औवेसी ने कर्नाटक हाईकोर्ट के फैसले को संविधान के खिलाफ बताया

बेंगलुरु

कर्नाटक हाईकोर्ट ने कक्षा में हिजाब पहनने की अनुमति देने का अनुरोध करने वाली उडुपी स्थित ‘गवर्नमेंट प्री-यूनिवर्सिटी गर्ल्स कॉलेज’ की मुस्लिम छात्राओं के एक वर्ग की याचिकाएं मंगलवार को खारिज कर कहा कि हिजाब पहनना इस्लाम धर्म में आवश्यक धार्मिक प्रथा का हिस्सा नहीं है।
फैसले के बाद एआईएमआईएमचीफ असदुद्दीन ओवैसी का बड़ा बयान सामने आया है। ओवैसी ने हिजाब विवाद पर आए कर्नाटक हाईकोर्ट के फैसले को संविधान के खिलाफ बताया है। उन्होंने कहा कि यह निर्णय धर्म, संस्कृति, अभिव्यक्ति और कला की स्वतंत्रता जैसे मौलिक अधिकारों का उल्लंघन करता है। इसका मुस्लिम महिलाओं पर नकारात्मक प्रभाव पड़ेगा, उन्हें निशाना बनाया जाएगा। ओवैसी ने कहा कि आधुनिकता धार्मिक प्रथाओं को छोड़ने के बारे में नहीं है। आखिर हिजाब पहनने से क्या दिक्कत है?
ओवैसी ने कहा कि हम कर्नाटक हाईकोर्ट के फैसले से सहमत नहीं है। यह संविधान के अनुच्छेद 15 की अवहेलना करता है। हाईकोर्ट ने कहा है, कि हिजाब आवश्यक धार्मिक अभ्यास नहीं है, लेकिन इसका निर्णय कौन करेगा? इस फैसले के खिलाफ हम इसकारण सुप्रीम कोर्ट जाएंगे।
उन्होंने कहा कि फैसले से नकारात्मक असर होगा और जगह-जगह मुस्लिम महिलाओं को निशाना बनाया जाएगा। संविधान में विवेक की स्वतंत्रता के तहत हमें इजाजत है कि अपना हिजाब भी पहनू और शिक्षा भी हासिल करूं।
ओवैसी ने कहा कि संविधान की प्रस्तावना में कहा गया है कि व्यक्ति के पास विचार, अभिव्यक्ति, विश्वास, आस्था और पूजा की स्वतंत्रता है। अगर यह मेरा विश्वास है कि मेरे सिर को ढंकना आवश्यक है तो मुझे इसे व्यक्त करने का अधिकार है, जो मुझे ठीक लगता है। एक धर्मनिष्ठ मुसलमान के लिए हिजाब भी एक इबादत है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *