पदोन्नति प्रक्रिया में रोस्टर प्रणाली लागू होने की आशंका से कर्मचारियों में रोष
विकासनगर। कर्मचारियों, शिक्षकों की पदोन्नति के लिए वरिष्ठता सूची मैरिट के बजाय आरक्षण के रोस्टर के आधार पर लागू किए जाने की आशंका को देखते हुए पछुवादून में कर्मचारियों में इसे लेकर विरोध की सुगबुगाहट होने लगी है। शिक्षक, कर्मचारी संगठनों का कहना है दस मार्च के बाद प्रदेश में बनने वाली सरकार के समक्ष इस मसले को उठाया जाएगा। साथ ही सरकार से इस मामले पर सभी कर्मचारियों के हितों को देखते हुए सुप्रीम कोर्ट में उचित पैरवी की मांग की जाएगी।
जूनियर हाईस्कूल शिक्षक संघ के पूर्व जिलाध्यक्ष अनंत सोलंकी और पूर्व प्रदेश अध्यक्ष सुरेश नौटियाल ने मीडिया को जारी बयान में कहा कि पदोन्नति प्रत्येक कर्मचारी का मौलिक अधिकार है। शिक्षकों के लिए पहले से ही पदोन्नति के कम अवसर मिलते हैं। ऐसे में पदोन्नति रोस्टर के आधार पर किए जाने से कई शिक्षक पूरे सेवा काल में बिना पदोन्नति पाए ही सेवानिवृत्त हो जाएंगे। संघ के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष अतुल शर्मा ने कहा कि वरिष्ठता सूची में जूनियर शिक्षक, कर्मचारियों के पदोन्नति पाने से वरिष्ठ कर्मचारियों के मनोबल पर विपरीत प्रभाव पड़ेगा। दूसरी ओर ग्रामीण विकास विभाग मिनिस्ट्रीयल एसोसिएशन के प्रांतीय उपाध्यक्ष पुष्पेंद्र त्यागी ने कहा कि 2006 में आए शासनादेश के अनुसार रोस्टर आरक्षण कोटा को भरने में मदद करने के लिए है, न कि वरिष्ठता क्रमांक निर्धारित करने के लिए। कहा कि अधिकारियों ने कोर्ट के समक्ष शासन की नीतियों और नियमों का उचित तरीके से प्रस्तुतीकरण नहीं किया, जिसका खामियाजा हजारों कर्मचारियों को भुगतना पड़ेगा। कहा नई सरकार को इस मामले कोर्ट में उचित पैरवी करनी होगी। सरकार इस मामले पर संज्ञान नहीं लेगी तो कर्मचारी, शिक्षक संगठन एकजुट होकर कोर्ट की शरण लेगें। वहीं यूजेवीएनएल बिजली कर्मचारी संघ के अतिरिक्त प्रांतीय महामंत्री विशाल गुप्ता ने कहा कि सरकारी नौकरी प्राप्त करने वाले एससी, एसटी और सामान्य वर्ग के व्यक्ति की स्थिति एक समान हो जाती है। लिहाजा पदोन्नति में आरक्षण की व्यवस्था को लागू किया जाना सामान्य वर्ग के कर्मचारियों के हितों का हनन है।
