लोकतंत्र में सिर्फ तंत्र बचा है, लोक विलुप्त हो चुका है – नवीन चौधरी
वाराणसी
काशी हिन्दू विश्वविद्यालय के कामधेनु सभागार में राजनीति की नर्सरी : छात्र राजनीति विषयक गोष्ठी का आयोजन हुआ। कार्यक्रम में बतौर मुख्य अतिथि बोलते हुए चर्चित पुस्तक ‘जनता स्टोर’ और ‘ढाई चाल’ के लेखक नवीन चौधरी ने कहा कि छात्र राजनीति पर केंद्रीत मेरी पहली पुस्तक का नाम जनता स्टोर राजस्थान यूनिवर्सिटी के पास के एक मार्केट के ऊपर है जिसमें जनता स्टोर तो बंद हो चुका है लेकिन लोग आज भी उस मार्केट को जनता स्टोर के नाम से जानते हैं। ठीक उसी तरह हमारे लोकतंत्र में लोक की आवाज़ को सुनना जाने कबसे बंद हो चुका है बचा है तो सिर्फ तंत्र। आज देश को राजनीति कि नहीं जननीति कि जरूरत है। राजनीति आज बहुत ही नेगेटिव शब्द बन चुका है। कभी इस शब्द का अर्थ रहा होगा राज्य की नीति किन्तु आज यह बस धोखे, षड्यंत्र और तमाम अनैतिक गतिविधियों का पर्यायवाची चुका है।छात्र राजनीति की वह बिंदु है जहाँ से हम देश-समाज में हो रहे गलत कार्यों, नीतियों को गलत कहने का साहस जुटा पाते हैं। नवीन चौधरी ने मार्केटिंग प्रोफेशनल से लेकर एक लेखक तक कि अपनी यात्रा के बारे में विस्तार से बताया। उन्होंने कहा कि अपनी किताबों का प्रचार ना करना मैं पाप मानता हूँ। मैं खुलकर अपनी किताबों का प्रचार करता हूँ, हाँ मैं यह साफ कर दूँ कि मैं अपनी किताब का प्रचार करता हूँ, उन्हें बेचता नहीं हूँ।इसके बाद कार्यक्रम में बतौर विशिष्ट वक्ता संबोधित करते हुए डॉ. मयंक नारायण सिंह ने कहा कि बनारस के युवाओं को साहित्य-संवाद के रचनात्मक कार्यक्रम के जरिये आगे आने कि जरूरत है। छोटे-छोटे सम्मिलित प्रयासों को जोड़कर बड़ी लकीर खींचने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि नए लेखकों को अपने लिखे में विश्वास करना सीखना चाहिए, अच्छे सम्पादकों को ढूंढ कर उनसे अपनी किताब संपादित करानी चाहिए। क्योंकि बिना अच्छे सम्पादन के कोई भी पुस्तक अच्छी नहीं बन सकती। कार्यक्रम में अध्यक्षीय उद्बोधन देते हुए डेयरी एवं खाद्य प्रौद्योगिकी विभाग के विभागाध्यक्ष प्रो. डी. सी. राय ने कहा कि नवीन जी को सुनने से यह विचार और प्रबल होता है कि आदमी चाहे तो हमेशा अपनी जड़ों से जुड़ा रह सकता है चाहे वो अपनी माटी से कितना भी दूर हो। नवीन जी अपनी जन्मभूमि मधुबनी से, संस्कृत के विद्वान अपने पिता प्रो. अर्कनाथ चौधरी से अनायास ही मिले साहित्य, ज्ञान एवं लेखन की अपनी पारिवारिक परंपरा को आगे बढ़ा रहे हैं।इसके पूर्व कार्यक्रम में स्वागत उद्बोधन देते हुए पत्रकारिता विभाग के हर्षित श्याम ने कहा कि देश को डॉक्टर, इंजिनियर, नौकरशाह, वैज्ञानिक, संस्कृतिकर्मी तैयार कर देने वाले विश्वविद्यालय ही वह स्थल हैं जिन्हें अच्छे नेताओं को भी देश की सेवा करने के लिए तैयार करना है। जैसे हर व्यवस्था में कुछ खामी आ जाती है छात्रसंघ की व्यवस्था में भी समय के साथ कुछ खामी आ गई थी। जिसके कारण सर्वविद्या की इस राजधानी में छात्र राजनीति को बंद करना पड़ा। किन्तु किसी भी व्यवस्था को बंद करना कभी विकल्प नहीं होता बल्कि उसमें उसमें सुधार करना ही विकल्प होता है। मुझे उम्मीद है हम अपने नीति नियंताओं को यह बात समझा पाएंगे। इस अवसर पर कार्यक्रम का संचालन एवं धन्यवाद ज्ञापन सुश्री चंद्राली मुखर्जी ने किया। इस अवसर पर कार्यक्रम में प्रो. प्रभाकर सिंह, डॉ. धीरेंद्र राय, डॉ. नवीन, रवि कुमार राय, सौरभ चक्रवर्ती आदि उपस्थित रहे।
