काम न होने पर आवेदक मजबूरन लेते है दलालों का सहारा
उन्नाव।
प्रदेश सरकार जहां एक तरफ परिवहन विभाग की व्यवस्थाओं को जनहितकारी बनाने की तरफ लगातार प्रयत्नशील है। उनके विभाग के ही मंत्री बीते दिवस वर्चुवल माध्यम से समीक्षा बैठक के दौरान व्यवस्थाओं में सुधार के निर्देश दिए। बीती 13 सितंबर को बैठक के दौरान परिवहन राज्य मंत्री स्वतंत्र प्रभार अशोक कटारिया ने कहा कि भिन्न भिन्न तरह की ट्रालियों के निर्माण पर तत्काल रोक लगाई जाये। डीटीसी व आरटीओ अपने अधीनस्थ अधिकारियों के कार्यो का नियमित अनुश्रवण करें। सीटबेल्ट, हेलमेट सहित बकाया वसूली में तेजी लाई जाये। ओवरलोडिंग व उसके अनाधिकृत संचालन पर कडी कार्यवाही की जाये।
लेकिन उनके ही विभाग में उनकी कही गई किसी भी बात का कोई असर होता दिखाई नही देता। अभी बीते दिवस नोडल अधिकारी जिले के तीन दिवसीय दौरे पर रहे। इसके बावजूद एआरटीओ कार्यालय में भ्रष्टाचार चरम पर चलता रहा। इसका संजाल ही इतना गहरा है कि इतनी आसानी से समेटा नही जा सकता। पूरी की पूरी व्यवस्था ही भ्रष्टाचार की गंदगी से लबरेज है। या यूं कहे कि व्यवस्था में लगे व्यवस्थापक गांधारी बने हुए है तो व्यवस्था अंधेर नगरी चौपट राजा टके शेर भाजी टके शेर खाजा की नीति पर संचालित हो रही है। वहां पर काम के लिए जाने वाले आवेदक आनलाइन व्यवस्था के बावजूद कार्यालय की परिक्रमा करते ही थकते है और फिर थकहार कर बाहरी दलालों का सहारालेने को मजबूर होते है। यह मजबूरी भला पल उनके लिए किसी संजीवनी से कम नही होता, क्या करें साहब व्यवस्था ही कुछ ऐसी बन गई है। ईमानदारी से काम करवाने वाला आवेदक परीक्षा में कई बार फेल कर दिया जाता है लेकिन भ्रष्टाचार का सहारा लेकर काम करने वाला आवेदक भले ही बाइक का हैण्डल तक न पकडा हो लेकिन अव्वल नंबरों से पास करवा दिया जाता है। नाम न छापने की शर्त पर आवेदकों ने बताया कि जब बिना दलालों से संपर्क किए काम करवाने के लिए पटल पर जाओ तो इधर से उधर टहला दिया जाता है। काम न होने की परिस्थिति में आवेदक मजबूरन भ्रष्टाचार का सहारा लेने को मजबूर होता है। वाहन का लाइसेंस बनवाने वाले इन युवाओं को जब ऐसी चौखटों से निराशा होना पडेगा तो आगे इसका दूरदर्शी परिणाम कैसा होगा यह तो आने वाला समय ही बतायेगा।
