सीसीटीवी फुटेज से बयां हो सकती है कार्यालय की कुछ हकीकत
उन्नाव
एआरटीओ कार्यालय में व्याप्त अव्यवस्थाओं के बाद व्यवस्था ऑनलाइन किए जाने की कवायद शुरु की गई थी। आज कहने को तो एआरटीओ विभाग आनलाइन व्यवस्था से जुड चुका है लेकिन दलालों की कमाई पर अंकुश आज भी नही लग पाया है। शासन स्तर पर अगर इन कार्यालयों की आनलाइन मानिटरिंग करवाई जाये तो कुछ हद तक सुधार की बात लोगो में कही व सुनी जा रही है। कार्यालय में कहने को तो सीसीटीवी कैमरे लगे हुए है लेकिन व्यवस्थाएं तक भी जस की तस बनी हुई है। बता दें कि कार्यालय में लगे हुए सीसीटीवी कैमरे को निष्पक्षता से जांचा जाये तो निश्चित तौर पर कई पर्ते खुलकर सामने आने की बात कही जा रही है। इधर, नाम न छापने की शर्त पर एक आवेदक ने बताया कि वह पहले अपना काम कराने के लिए पटल पर गया। लेकिन वहां पर जब काम नही बना तो वह बाहर बैठे दलालों के संपर्क में गया। तो उसे लाइसेंस की एवज में 4500 रुपये की मांग की गई है। वह उसे भरोसा है कि उसका काम हो जायेगा।
गौरतलब बात यह है क एआरटीओ कार्यालय के बाहर बडे वाहन खडे रहते है। जिससे कभी भी कोई हादसा घटित हो सकता है। दूसरी तरफ कार्यालय के बाहर खाने पीन की दुकान होने से हाइवे पर लोगो का जमावडा इकठ्ठा होता है। इससे भी दुर्घटनाओं की संभावना बनी रहती है।
चर्चाएं इस बात की भी कार्यालय में बहुत है कि पहले लाइसेंस का चार्ज आरआई कृष्ण कुमार यादव के पास था। लेकिन इस कमाऊ सीट का चार्ज एआरटीओ आदित्य त्रिपाठी के आते ही उन्होने अपने पास ले लिया। वैसे तोे यह सीट कई बार बिन आरआई के होने पर रिक्त रही। तब इसका चार्ज अधिकांशतः एआरटीओ प्रशासन देखते रहे। लेकिन इस बार आरआई होते चार्ज एआरटीओ ने अपने पास ले रखा है। यह बात कार्यालय के लोगो सहित बाहर भी चर्चा का विषय बना हुआ है।
मामले में जब आरटीओ लखनऊ से संपर्क किया गया तो उनका मोबाइल बंद आया।
