कुशल होने के साथ-साथ व्यावहारिक चिकित्सक होना भी जरूरी
हल्द्वानी
राजकीय मेडिकल कॉलेज के मेडिकल ऐजुकेशन यूनिट द्वारा 2 से 4 नवंबर तक तीन दिवसीय बेसिक कोर्स इन मेडिकल एजुकेशन (बीसीएमई) कार्यशाला का समापन हो गया। शनिवार को लेक्चर थिएटर में वक्ताओं ने कहा कि एमबीबीएस करने के बाद छात्र जब चिकित्सक बनकर कॉलेज से निकलेगा उस समय वह कुशल चिकित्सक के साथ-साथ व्यावहारिक चिकित्सक होना भी जरूरी है। डॉक्टर को चिकित्सकीय ज्ञान के साथ-साथ चिकित्सा नैतिकता, आमजन से व्यवहार, बोलने में विनम्रता का ज्ञान सीखना होगा, जो पांचों वर्ष के प्रत्येक वर्ष में बताया जाएगा। साथ ही संकाय सदस्यों को छात्रों का मूल्याकन करते समय चार बातों को ध्यान में रखना होगा जिसमें थियोरी (सिद्धान्त) का ज्ञान, चिकित्सकीय ज्ञान, मनोदृष्टि का ज्ञान, बातचीत का कौशल (व्यावहारिक ज्ञान) शामिल है। जो छात्र इन सभी चारों श्रेणी में पास होता है वह योग्य चिकित्सक बनने के लायक है। मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य डॉ. अरूण जोशी कहा कि समय-समय पर ऐसी कार्यशाला आयोजित होनी चाहिए। कार्यशाला के निरीक्षण को एनएमसी ने प्रोफेसर डॉ. विनय शर्मा एनॉटमी विभाग मुजफ्फरनगर मेडिकल कॉलेज को कोआर्डिनेटर नियुक्त किया गया। कार्यशाला में डॉ. भावना श्रीवास्तव, डॉ. साधना अवस्थी, डॉ. उमेश, डॉ. हरिशंकर पांडे, डॉ. रितु रखोलिया, डॉ. परमजीत सिंह, डॉ. गणेश सिंह, डॉ. विमलेश शर्मा, डॉ. सुमन पांडे आदि मौजूद रहे।
