मंगलौर में निकाला मातमी जुलुस
रुड़की

नवासा ए रसूल हजरत इमाम हुसैन द्वारा मदीने से कर्बला का सफर शुरू करने की याद में अकीदत मंद अजादारों ने मजलिसों आयोजन किया। मातमी जुलूस निकालकर हजरत इमाम हुसैन को श्रद्धासुमन अर्पित किए। हिजरी महीने रजब की 28 तारीख को सन 60 हिजरी में नवासा ए रसूल हजरत इमाम हुसैन ने कर्बला के इस सफर की शुरुआत की थी। जिसके बाद वह मोहर्रम महीने की दो तारीख सन 61 हिजरी में इराक स्थित कर्बला के मैदान में पहुंचे थे। जहां पर दसवीं मोहर्रम को उन्होंने अपने खानदान व साथियों के साथ दीन ए खुदा की रक्षा के लिए रहे खुदा में अपने सिर की कुर्बानी पेश की थी। इस दिन को यौम ए गम के रूप में मनाया जाता है। नगर के मोहल्ला पठानपुरा स्थित इमामबाड़ा दरबारे हुसैन में मजलिस का आयोजन हुआ।
मौलाना वसी हैदर गाजी जैनपुरी ने कहा कि इस्लाम शब्द का अर्थ है सलामती। इस्लाम सब की सलामती चाहता है। इसके बाद मातमी जुलूस शुरू हुआ जो की बारगाहे जैनबिया, बारगाह ए बाबुल मुराद होता हुआ मोहल्ला पठानपुरा स्थित बड़े इमामबाड़े पर पहुंचकर संपन्न हुआ। बड़े इमामबाड़े पर मजलिस से पहले सोजो सलाम सैयद अली हैदर जैदी व उनके साथियों ने पेश किये। पेशखवानी शायर सैयद कौसर जैदी कैरानवी द्वारा की गई। जबकि मजलिस को मौलाना इकबाल हुसैन ने संबोधित किया। बारगाह ए जैनबिया में मौलाना सिब्ते हसन ने मजलिस को संबोधित किया।
इस अवसर पर अमीर हैदर जैदी, अली मेहंदी जैदी,रजब अली आरफी,अकील हुसैन, शबाब जैदी, वफा आबदी, फहीम हैदर जैदी, रियाज़ हसन जैदी, नसीम हैदर, शमीम हैदर, मोहर्रम अली, दानिश जैदी, मीर जमीर, नजर अब्बास, युसूफ हुसैन, मोहम्मद अली जाफरी, आदिल मंगलौरी, हयात जैदी, शफाअत हुसैन आदि भारी संख्या में लोग मौजूद रहे।
