कमर तक भरे पानी से फसल लाने को मजबूर हैं कोलुआ के किसान
विदिशा।
प्रदेश में खेत सड़क योजना के तहत सैंकड़ों किलोमीटर की सड़क बनने का दावा किया जा रहा है। विदिशा जिले के ग्यारसपुर जनपद पंचायत के कोलुआ गांव में हालात इसके विपरीत हैं। यहां किसान सड़क बनवाने के लिए खुद भी राशि मिलाने को तैयार हैं लेकिन जिले के जिम्मेदार अफसर उदासीन बने हुए हैं। नतीजतन गांव के करीब 50 किसानों की सौ हेक्टैयर की खरीफ फसल इस बार भी सडऩे की कगार पर है। अपनी फसल बचाने के लिए किसान को कमर तक पानी से होकर फसल लेकर गुजना पड़ता है। कोलुआ गांव के किसान फसल को बचाने के लिए सड़क बनाने जन भागीदारी में सात लाख रुपये की राशि देने को तैयार हैं। इसके बावजूद सरकारी अफसरों ने दो साल से इस प्रस्ताव को मंजूरी ही नहीं दी। लगातार बारिश के कारण किसानों की उड़द की फसल सडऩे लगी है। गांव के किसान छमाधर शाक्य और धीरज गुर्जर बताते हैं कि गांव से दो किमी दूर 50 किसानों के खेत हैं। इन खेतों के एक किमी क्षेत्र में बारिश का पानी भर जाता है। इस सड़क पर इतना कीचड़ होता है कि ट्रेक्टर तक नहीं निकल पाता। दूसरेां के खेतों से मजदूर भेजकर उन्होंने उड़द और सोयाबीन की फसल तो कटवा ली लेकिन वे कटी फसल की थ्रेसिंग नहीं करा पा रहे, क्योंकि खेत तक थ्रेशर मशीन तक नहीं पहुंच रही है। किसान थोड़ी थोड़ी फसल रोज सड़क पर भरे पानी से निकालकर घर ला रहे हैं ताकि उपज निकाल सके। इधर, ग्राम पंचायत के सचिव हनुमत सिंह का कहना है कि एक किमी सड़क निर्माण के लिए पंचायत ने 14 लाख रुपए का प्रस्ताव तैयार किया था, जिसमें सात लाख रुपये की राशि किसान और सात लाख रुपये की राशि जन भागीदारी योजना के तहत शासन से मिलनी थी। इस प्रस्ताव को अब तक मंजूरी नहीं मिली है। किसानों के मुताबिक पहले सड़क पर जल जमाव की स्थिति नहीं थी। चार साल पहले इसी रास्ते के बगल से ग्राम आबिदगंज को जाने के लिए मुख्यमंत्री सड़क योजना के तहत पक्की सड़क बनाई गई। सड़क की ऊंचाई अधिक होने से बारिश का पानी का बहाव रुक गया। जिसकी वजह से अब खेतों से बहकर आने वाले बारिश के पानी का जमाव सड़क पर ही होने लगा है।
