भारत का युवा बने एक्टिव और इफेक्टिव: स्वामी चिदानन्द सस्वती
ऋषिकेश। परमार्थ निकेतन के अध्यक्ष स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी ने स्वामी विवेकानन्द जी की जयंती पर नमन करते हुये कहा कि अध्यात्म जगत के शिरोमणि, एक ऐसे चिंतक जिन्होंने भारत के गौरव, भारतीय संस्कृति और आध्यात्मिक चिंतन को सात समन्दर पार पश्चिम की धरती तक पहुंचाया, ऐसे महान संत, युवाओं के प्रेरणास्रोत स्वामी विवेकानन्द जी ने शिकागो में आयोजित ‘विश्व धर्म महासभा’ में हिंदू धर्म को सहिष्णु तथा सार्वभौमिक धर्म के रूप में व्यक्त कर पूरे विश्व को दिखा दिया कि यह केसरी रंग केवल दिखता ही केसरी नहीं है बल्कि इसमे हमारे देश की गरिमा, त्याग, हमारा साहस और वसुधैव कुटुम्बकम् के सूत्र भी समाहित है। स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी ने कहा कि किसी भी राष्ट्र का भविष्य वहां के युवाओं पर निर्भर करता है और भारत तो युवा आबादी वाला राष्ट्र है। स्वामी विवेकानन्द जी ने युवाओं के मार्गदर्शन के लिये अनेक दिव्य सूत्र दिये ताकि भारत का युवा एक्टिव और इफेक्टिव बने। स्वामी जी ने युवाओं को संदेश देते हुये कहा कि 4 आई प्रोग्राम ’’इंफॉर्मेशन, इंस्पिरेशन, इंप्लीमेंटेशन, इनोवेशन’’ से अपने देश और समाज को समृद्ध बनाये। यूथ अपना टाइम, टेलेंट, टेक्नोलॉजी और टेनासिटी को देश की सेवा हेतु समर्पित कर समृद्ध समाज के निर्माण के भागीदारी बने। देश हमें देता है सब कुछ हम भी तो कुछ देना सीखे। अब वह समय आ गया जब हम ग्रिड कल्चर से नीड कल्चर की ओर बढ़़े। यूज एंड थ्रो कल्चर से यूज एंड ग्रो कल्चर को अपने जीवन का ध्येय बनाये। हम केवल अपने लिये ही नहीं बल्कि सर्वे भवन्तु सुखिनः, लोकाः समस्तः सुखिनः भवन्तु के सूत्रों को आत्मसात कर जीवन में आगे बढ़ते रहे। स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी ने कहा कि वर्तमान समय में वायु प्रदूषण के साथ वाणी प्रदूषण और वैचारिक प्रदूषण सबसे बड़ी समस्या है। विचार, व्यक्तित्त्व की जननी है इसलिये बढ़ते वैचारिक प्रदूषण पर ध्यान देना अत्यंत आवश्यक है। स्वामी विवेकानंद जी और महात्मा गांधी जी जैसे महापुरुषों का कभी मरण नहीं बल्कि स्मरण होता हैं। वे मृत्यु के बाद भी अपने श्रेष्ठ विचारों के कारण जीवित रहते हैं; अमर हो जाते हैं। युगों-युगों तक उनके विचार और शिक्षायें समाज को प्रेरित करती हैं; लोगों का मार्गदर्शन करती है। स्वामी जी ने कहा कि हमारे वेद हमें वसुधैव कुटुम्बकम् विश्व एक परिवार है का संदेश देते हैं और स्वामी विवेकानंद जी ने हमें मानववाद की प्रेरणा प्रदान की ताकि वैश्विक स्तर पर एक आदर्श समाज की संकल्पना को साकार किया जा सके। आईये राष्ट्र प्रथम के सूत्र को आत्मसात कर जीवन जीने का संकल्प ले यही हमारी ओर से स्वामी विवेकानन्द जी को सच्ची श्रद्धाजंलि होगी।
