प्रशासन ने दो दिनों में हटाए 80 ढाबे
रुद्रप्रयाग। सोनप्रयाग से गौरीकुंड के बीच 5 किमी की दूरी में संवेदनशील स्थानों पर बनाए गए कच्चे और पक्के ढाबों को हटाने के लिए प्रशासन की कार्रवाई दूसरे दिन भी जा रही रही। हालांकि प्रशासन का कहना है कि सुरक्षा की दृष्टिगत यह कार्रवाई की जा रही है। कुछ लोगों द्वारा स्वत: ही डर के कारण अपने ढाबे हटा लिए गए हैं। दो दिनों के भीतर प्रशासन ने 80 कच्चे व पक्के ढाबो को हटा लिया है।
गौरीकुंड में भूस्खलन की घटना के बाद प्रशासन हरकत में आया है। सोनप्रयाग और गौरीकुंड के बीच बने सौ से भी अधिक बाहरी लोगों के ढाबों को हटाने की कार्रवाई की जा रही है। हालांकि प्रशासन का तर्क है कि जहां संवेदनशील स्थान हैं और दुर्घटना का खतरा बना है, उन्हीं लोगों को अपने ढाबे हटाने को कहा गया, जिन्होंने स्वयं ही हटाने में सहयोग दिया है। रविवार को एसडीएम ऊखीमठ जितेंद्र वर्मा के निर्देशों पर ऊखीमठ तहसील की राजस्व टीम ने करीब 40 ढाबे हटाए जिनमें अधिकांश कच्चे थे। जबकि शनिवार को भी इतनी ही संख्या में ढाबे हटाए गए। दो दिनों के भीतर करीब 80 ढाबे हटाए गए हैं जबकि प्रशासन द्वारा 190 लोगों को नोटिस दिए गए हैं। एसडीएम ऊखीमठ जितेंद्र वर्मा ने बताया कि 70 फीसदी अस्थाई ढाबे लगाए गए थे जिनमें अधिकांश लोगों ने स्वयं ही हटाए। प्रशासन द्वारा महज उन्हें सूचित किया गया था।
रोजगार उजाड़ने से लोगों में आक्रोश: गौरीकुंड और सोनप्रयाग में यात्रा से बड़ी संख्या में स्थानीय एवं बाहरी लोगों का रोजगार जुड़ा है। नेपाली मूल के अधिकांश लोग यहां हर साल कारोबार करने आते हैं, किंतु प्रशासन की कार्रवाई से उनमें काफी आक्रोश है। नेपाल निवासी राम बहादुर, दिल बहादुर, राखी देवी आदि ने कहा कि प्रशासन ने जिन लोगों के ढाबे तोड़े उन्हें सामान हटाने का वक्त भी नहीं दिया, जिससे बड़ी मात्रा में उन्हें नुकसान उठाना पड़ा। उन्होंने कहा कि यहां लोग सीजन में रोजी रोटी के लिए आते है, किंतु प्रशासन की एकतरफा कार्रवाई से लोगों को काफी नुकसान उठाना पड़ा।
