सुप्रीम कोर्ट ने वन रैंक वन पेंशन योजना को मंजूरी दी, मोदी सरकार को राहत
नई दिल्ली
सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को पूर्व सैनिकों के लिए मोदी सरकार की शुरू होने वाली वन रैंक वन पेंशन योजना को मंजूरी दे दी है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा हैं, कि मोदी सरकार की योजना के कार्यान्वयन में कोई दोष नहीं है। इसमें सशस्त्र बलों में वन रैंक वन पेंशन मामले में केंद्र सरकार को बड़ी राहत मिली है। सुप्रीम कोर्ट ने रक्षा बलों में ‘वन रैंक वन पेंशन योजना शुरू करने के तरीके को बरकरार रखा है।
फैसले में सुप्रीम कोर्ट ने कहा, हमें ओआरओपी के अपनाए सिद्धांत में कोई संवैधानिक खामी नहीं दिखी। ऐसा कोई विधायी जनादेश नहीं है, कि समान रैंक वाले पेंशनभोगियों को समान पेंशन दी जानी चाहिए। सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि वन रैंक-वन पेंशन’ (ओआरओपी) सरकार का नीतिगत निर्णय है और नीतिगत मामलों के निर्णय में अदालत हस्तक्षेप नहीं करता। मोदी सरकार का वन रैंक-वन पेंशन’ (ओआरओपी) का फैसला मनमाना नहीं है, किसी संवैधानिक अशक्तता से ग्रस्त नहीं है। ओआरओपी की लंबित पुनर्निर्धारण प्रक्रिया एक जुलाई, 2019 से शुरू की जानी चाहिए और तीन महीने में बकाया राशि का भुगतान किया जाना चाहिए।
सुप्रीम कोर्ट ने पूर्व सैनिकों के संघ की उस याचिका पर अपना फैसला 23 फरवरी को सुरक्षित रख लिया था, जिसमें ‘एक रैंक, एक पेंशन’ (ओआरओपी) के पांच साल में एक बार समीक्षा की वर्तमान नीति के बजाय भगत सिंह कोश्यारी समिति की सिफारिश के अनुसार वार्षिक आधार पर लागू करने का अनुरोध किया गया था। जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ की अध्यक्षता वाली पीठ ने 23 फरवरी को अपना फैसला सुरक्षित रख कर केंद्र से पूछा था कि क्या ओआरओपी के पांच साल में एक बार समीक्षा अवधि को कम करके पूर्व सैनिकों की कठिनाइयों को कुछ हद तक कम किया जा सकता है या नहीं?
