पीडि़त ने मुख्यमंत्री को शिकायती पत्र देकर निष्पक्ष जांच कराये जाने की मांग
हमीरपुर
जैसे जैसे चुनाव नजदीक आते जा रहे है। वैसे वैसे लोगो का दर्द झलकने लगा है। पिछले पांच वर्षो से लगातार सरीला नगर पंचायत अध्यक्ष एवं राठ विधायक के द्वारा तानाशाही पूर्ण रवैया को लेकर आवाजे उठती रही है। लेकिन आचार संहिता लागू होते ही लोगो का गुस्सा फूटने लगा है। क्योंकि लोगों का कहना है कि इनके द्वारा लगातार गरीबों की जमीनों पर कब्जा, विकास कार्यों मै भारी भरकम कमीशन लेना ना देने पर लोगों की जांच कराके इन पर मुकदमा लगवाना आम बात रही है। पिछले पांच साल पहले नगर पंचायत अध्यक्ष के खिलाफ चुनाव लडना महेन्द्र मंत्री सरीला को भारी पड़ा। उसी तरह विधायक के द्वारा निर्माण कार्यों में भ्रष्टाचार के खिलाफ आवाज उठाना भाजपा के पूर्व जिलाध्यक्ष मनोज गुप्ता को महंगा पड़ा था। उनके मकान पर राठ में विधायक के पति ने अपने गुर्गों से हमला करा दिया। जिससे नाराज होकर उन्होंने धरने पर बैठके आंदोलन शुरू कर दिया था। इसके बाद से इन दोनो जनप्रतिनिधियों ने लगातार कारकर्ताओ एवं इनके खिलाफ आवाज उठाने वालो पर सत्ता की हनक में उनका उत्पीडऩ शुरू कर दिया था। जैसे ही चुनाव आचार संहिता लागू हुई लोग इनके खिलाफ राठ से लेकर राजधानी लखनऊ तक सडक़ों पर उतर आए और इनकी कारनामों का काला चि_ा मुख्यमंत्री, प्रदेश अध्यक्ष स्वतंत्रदेव सिंह, प्रियंका रावत, सुशील बंसल के साथ साथ एक डेलीगेशन दिल्ली पहुंच गया है। वही सरीला के राष्ट्रीय लोधी युवा महासभा के राष्ट्रीय महासचिव महेंद्र मंत्री की पत्नी ने भी मनीषा अनुरागी के पति लेखराम एवं शैफाली सिंह के द्वारा पुलिस पर दबाव बनाकर फर्जी मुकदमा दर्ज कराने के गंभीर आरोप लगाए है। उन्होंने अपने दिए गए शिकायती प्रार्थना पत्र में मुख्यमंत्री, मुख्य निर्वाचन आयुक्त भारत सरकार से भी न्याय की गुहार लगाई और अपनी सुरक्षा के साथ साथ अपने पति के ऊपर लगाए गए झूठे मुकदमों की निष्पक्ष जांच किसी अन्य जनपद से कराने की मांग की और सरीला निवासी चरण सिंह यादव व एक अज्ञात व्यक्ति जो रानी शैफाली और मनीषा अनुरागी के गुर्गे है। रोज मेरे घर की निगरानी करते है एवं इनसे मुझे वा मेरे पति को जान का खतरा होने बात कही और कहा की हमारे पति सामाजिक कार्यकर्ता है। पिछले कई वर्षो से सामाजिक क्षेत्र में कार्य कर रहे है। उन पर एक भी मुकदमा पंजीकृत नहीं था। आप किसी भी स्वतंत्र एजेंसी से जांच कराये जाने की मांग।
