श्रीमद भगवत गीता में लोक व्यवहार बोध पर की चर्चा
नई टिहरी।
राजकीय महाविद्यालय पौखाल में श्रीमद्भागवत गीता में लोक व्यवहार बोध विषय पर एक दिवसीय वर्चुअल संगोष्ठी का आयोजन किया गया। संगोष्ठी में भगवत गीता को लेकर वक्ताओं ने अपने-अपने विचार रखे।
सोमवार को उत्तराखंड संस्कृत अकादमी उत्तराखंड सरकार की ओर से आयोजित जिलास्तरीय संगोष्ठी का शुभारंभ महाविद्यालय के प्राचार्य प्रो. अवधेश नारायण सिंह ने किया। कार्यक्रम के मुख्य वक्ता शोध विभागाध्यक्ष लालबहादुर शास्त्री विश्वविद्यालय नईं दिल्ली के प्रो. शिवशंकर मिश्र ने कहा कि गीता में पारमार्थिक उपदेश तो हैं ही, साथ ही आहार, व्यवहार इत्यादि प्रत्येक विषय गीता में सूत्र रूप से कहे गये हैं। इसलिए प्रत्येक व्यक्ति को गीता का अध्ययन कर उसको आत्मसात करना चाहिए। कार्यक्रम के सहवक्ता प्राध्यापक उत्तराखंड संस्कृत विश्वविद्यालय हरिद्वार डॉ. अरविंद नारायण मिश्र ने कहा कि गीता मानवीय जीवन के सभी पक्षों को उजागर कर मानव को कर्मपथ पर प्रेरित करती है। विशिष्ट अतिथि प्राध्यापक राजकीय महाविद्यालय देवप्रयाग डॉ. महेशानंद नौड़ियाल ने कहा कि गीता सम्पूर्ण भारत का वास्तविक जीवन दर्शन है। इसलिए भारतीयता को यदि देखना हो तो गीता ही एकमात्र दर्पण है। संगोष्ठी में डॉ. संजीव भट्ट, चन्द्रशेखर नौटियाल, गिरीश कुमार अवस्थी, डॉ. हरीश गुरुरानी, प्रो. कमला चौहान, डॉ. महेशानंद नौड़ियाल, डॉ. ममता शर्मा डॉ. कमलेश शक्टा, डॉ. राघव झा, डॉ. संदीप कुमार, डॉ. प्रकाश चन्द्र जांघी आदि शामिल रहे।
