सरकार ने ध्यान न दिया तो चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी सपरिवार आगामी चुनाव में करेगा विरोध

लखनऊ

उत्तर प्रदेश के चतुर्थ श्रेणी राज्य कर्मचारी महासंघ के प्रदेश महामंत्री सुरेश सिंह यादव ने हड़ताल पर रोक लगने पर कड़ी आपत्ति जताई है। उन्होंने बताया है कि सरकार ने राज्य कर्मचारी संगठनों पर सरकार ने तीन तीन बार एस्मा लगाया। अब कर्मचारियों की बात ना सुनकर हड़ताल के माध्यम से बात रखने संगठनों की रोक लगा दी गई यह किसी भी दिशा में उचित नहीं है। सरकार व मुख्य सचिव उत्तर प्रदेश शासन ने भी कई बार संगठनों से वार्ता के निर्देश जारी किए लेकिन अपर मुख्य सचिव उत्तर प्रदेश शासन विभागाध्यक्ष मंडलायुक्त कर्मचारियों की समस्याओं का निस्तारण आज भी नहीं किया गया। उन्होंने कहा कि सरकार ने चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों की समस्याओं का समाधान न किया तो आगामी चुनाव में चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी विरोध दर्ज करायेगा।
प्रदेश महामंत्री सुरेश सिंह यादव ने बताया कि उत्तर प्रदेश चतुर्थ श्रेणी राज्य कर्मचारी महासंघ ने मुख्य सचिव से मिलकर 2 पक्षीय वार्ता करने का अनुरोध किया गया था। लेकिन आज तक कार्मिक विभाग के अपर मुख्य सचिव ने कोई वार्ता नहीं की। उत्तर प्रदेश में 18 महीने का राज्य कर्मचारियों को डीए का एरियर का भुगतान रोका गया था अब जबकि प्रदेश के वित्त मंत्री बेहतर आर्थिक स्थिति बता रहे है तो तत्काल रोक गए भत्ते, एरियर आदि का भुगतान किया जाए।ं सात भत्ते सरकार ने जो सीज किए गए हैं उनको तत्काल बहाल किया जाए। उन्होने कहा कि उत्तर प्रदेश में साढे चार लाख चतुर्थ सैनी कर्मचारियों के स्वीकृत पद रिक्त हैं जिनको तत्काल भरे जाने के आदेश किए जाने चाहिए। सरकार ने बराबर मीडिया के माध्यम से प्रिंटिंग मीडिया में भर्ती किए जाने के आदेश किए जा रहे हैं लेकिन जमीन स्तर पर कोई भी भर्ती नहीं हो रही। उन्होंने आरोप लगाया कि वाणिज्य कर विभाग में संग्रह अमीन की भर्ती किए जाने का ज्ञापन प्रकाशित हुआ लेकिन आज तक उस पर भी कोई कार्रवाई नहीं हुई। उन्होंने बताया कि कई ऐसे महत्वपूर्ण विभाग हैं जिनमें किसी किसी जिले में विभाग में एक भी चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी तैनात नहीं है उन्होंने उदाहरण दिया कि वाणिज्य कर विभाग में कई जनपद ऐसे हैं। औरैया जहां पर एक भी चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी नहीं है।उन्होने कहा कि सबसे छोटे कर्मचारियों कि कई बार लिखित व मौखिक अनुरोध के बावजूद कर्मचारियों की समस्याओं का निस्तारण नहीं किया गया जिसका आने वाले समय में विधानसभा के चुनाव में उत्तर प्रदेश सरकार को इसका खामियाजा भुगतना पड़ेगा। सबसे छोटे वर्ग के कर्मचारी एक पूरे प्रदेश में गांधीवादी आंदोलन के तहत सरकार के विरोध में मंडल स्तर जिला स्तर पर विरोध करेंगे।

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