अजादारों ने निकाला अंतिम मातमी जुलूस
रुड़की। हजरत इमाम हसन असकरी के शहादत दिवस पर अजादारों द्वारा अंतिम मातमी जुलूस निकाला गया। इसी तरह मोहर्रम का चांद देखने के साथ शुरू हुए मातमी कार्यक्रमों का समापन हो गया। मौलाना ने अपनी तकरीर में लोगों से आपसी भाईचारा कायम रखने की अपील की। उन्होंने कहा कि इंसानियत से बड़ा कोई धर्म नहीं है। सभी को आपसी सद्भाव बनाए रखने की जरूरत है। एक दूसरे के धर्म का सम्मान करें। मजलिस में रिहान हैदर, इमाम अली, शमशुल हसन, नसीम हैदर, मुशीर हुसैन, मोहम्मद अली जाफरी आदि ने मर्सिया तथा सोज खानी कर खिराज ए अकीदत पेश की। उत्तर प्रदेश से आए मौलाना मिर्जा जावेद रजा ने अपने संबोधन में कहा कि मोहर्रम का चांद नजर आने के साथ कर्बला के शहीदों की याद में लगातार मजलिसों का सिलसिला जारी रहता है। इन मजलिसों का मकसद हजरत इमाम हुसैन के पैगाम का प्रचार प्रसार करने का है। हजरत इमाम हुसैन ने कर्बला के मैदान में दीन ए इस्लाम के साथ-साथ इंसानियत को जीवन दान दिया था।
