एमएसपी कमिटी पर किसानों ने खोला मोर्चा, नाम भेजने से किया इनकार
नई दिल्ली ,02 अपै्रल (आरएनएस)। कृषि कानूनों के मुद्दे पर लंबे समय तक टकराव के बाद किसान नेताओं ने केंद्र सरकार पर नए आरोप लगाए हैं। किसानों के संगठन संयुक्त किसान मोर्चा ने न्यूनतम समर्थन मूल्य के मुद्दे पर प्रस्तावित कमेटी के लिए नाम भेजने से इनकार कर दिया है। मोर्चा का आरोप है कि सरकार इस कमेटी के बारे में उसके सवालों को टाल रही है। जब तक उसे कमेटी को लेकर सवालों के जवाब नहीं मिल जाते, वह अपनी तरफ से नाम नहीं भेजेगा। यह घटनाक्रम ऐसे समय सामने आया है, जब एक दिन पहले ही केंद्रीय कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने संसद में कहा था कि जैसे ही किसान मोर्चा की तरफ से नाम मिल जाएंगे, वह कमेटी का गठन कर देगी।
संयुक्त किसान मोर्चा की तरफ से बताया गया कि कृषि सचिव संजय अग्रवाल की तरफ से 22 मार्च को एसकेएम समन्वय कमेटी के सदस्य युद्धवीर सिंह के पास फोन आया था, जिसमें उन्होंने केंद्र सरकार की तरफ से गठित की जाने वाली कमेटी के लिए दो-तीन नाम मांगे थे। हालांकि इस बातचीत से कमेटी को लेकर कई सवालों के जवाब साफ नहीं हो पाए। इसके बाद मोर्चा की तरफ से सरकार को 24 मार्च को ईमेल भेजकर स्थिति स्पष्ट करने के लिए कहा गया। उसके बाद 30 मार्च को रिमाइंड कराया गया। इसके बाद भी अब तक सरकार से कोई जवाब नहीं मिला है।
किसान मोर्चा ने बताया कि 24 मार्च के लेटर में उसने सरकार से पूछा था कि प्रस्तावित कमेटी के टर्म ऑफ रेफरेंस क्या होंगे, यह क्या काम करेगी, इसमें और कौन-कौन सदस्य हैं, वो किन संस्थाओं से हैं। इसके अलावा ये भी पूछा गया था कि इस कमेटी का चेयरमैन कौन होगा, यह किस तरह काम करेगी, इसे अपनी रिपोर्ट देने के लिए कितना वक्त मिलेगा। सरकार से यह स्पष्ट करने के लिए भी कहा गया था कि यह कमिटी जो सुझाव देगी, वो सरकार पर बाध्यकारी होंगे या नहीं। मोर्चा ने कहा है कि जब तक इन सवालों के जवाब नहीं मिल जाएंगे, उसकी तरफ से सदस्यों के नाम भेजने का कोई मतलब नहीं है। इससे पहले, एमएसपी पर बनने वाली कमेटी को लेकर केंद्रीय कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने शुक्रवार को राज्यसभा में बयान दिया था।
