देवलुओं के साथ 27 दिन पैदल सफर कर दशहरा उत्सव में पहुंची मां चामुंडा

कुल्लू।

हिमाचल प्रदेश के शिमला के डोडरा क्वार से चामुंडा मां पहली बार दशहरा उत्सव में हिस्सा लेने के लिए पहुंची हैं। मंगलवार दोपहर को रथ ढालपुर मैदान में पहुंचा। देवलुओं के लिए यहां पहुंचना आसान नहीं था, लेकिन मां चामुंडा के आदेशों पर 27 दिन का पैदल सफर किया और दशहरा में पहुंचे। अंतरराष्ट्रीय दशहरा उत्सव में कुल्लू जिले के देवताओं को आना आम बात है। दशहरा में पहुंचने के बाद माता चामुंडा ने भगवान रघुनाथ के दरबार में हाजिरी भरी। इसके बाद माता के रथ को अस्थायी शिविर के बाहर रखा गया। अब यह रथ दशहरा समाप्त होने तक ढालपुर मैदान में ही रहेगा। मां के साथ कोई लाव-लश्कर नहीं है। पांच लोग इस देवी के रथ को कुल्लू तक लाए हैं।

माता चामुंडा ने दशहरा के दौरान भगवान रघुनाथ के पास हाजिरी लगाने का आदेश दिया था। इसके बाद रथ को कुल्लू लाया गया। दशहरा में आए हुए देवी-देवताओं से अलग प्रकार का यह रथ लोगों के लिए आकर्षण का केंद्र बना है। माता चामुंडा के कारदार केशव राम ने कहा कि रथ को पैदल ही ढालपुर तक लाया गया है। यहां तक पहुंचने में उन्हें 27 दिन का समय लगा है। दशहरा के समापन तक माता चामुंडा यहीं रहेंगी। शिमला से माता चामुंडा का रथ ढालपुर पहुंचने के बाद दशहरा उत्सव में आने वाले देवताओं की संख्या बढ़ गई है।

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